“प्रकाश झा का  मानना है कि  वक्त बदल गया है और सामाजिक परिवर्तन के साथ सवर्णों में जो गरीब लोग हैं जो पिछड़े हैं, उन्हें भी अगर आरक्षण दिया जाता है तो यह एक अच्छा कदम होगा.” 

 देश में आरक्षण को लेकर हर कोई अपनी राय रख रहा है. कुछ वर्षों पहले निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा ने आरक्षण पर फिल्म बनाई थी. सवर्णों को मिलने वाले आरक्षण और सवर्णों द्वारा आरक्षण की वजह से होने वाले सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को दर्शाया था. ऐसे में जबकि दूरदृष्टि के तौर पर अपनी फिल्म में कई वर्षों पहले प्रकाश झा ने इस मुद्दे को उठाया था ज़ी न्यूज़ ने उनसे इस पर चर्चा की.

प्रकाश झा ने कहा कि आरक्षण का मुद्दा देश में नया नहीं है. इस पर वह फिल्म भी बना चुके हैं. आरक्षण आज से नहीं पहले से चला आ रहा है. उनका मानना है कि जो दलित है, जो गरीब है, जो पिछड़े हैं उनके लिए आरक्षण हुआ करता था. लेकिन वक्त बदल गया है और सामाजिक परिवर्तन के साथ सवर्णों में जो गरीब लोग हैं जो पिछड़े हैं, उन्हें भी अगर आरक्षण दिया जाता है तो यह एक अच्छा कदम होगा.

अपनी फिल्म का जिक्र करते हुए प्रकाश झा कहते हैं कि उन्होंने अपनी फिल्म में भी इसी बात का जिक्र किया था. सामाजिक परिवर्तन के साथ कई चीजों में बदलाव आता है, लेकिन जो भी चीजें आए और जो भी पैक्ट बने उस पर सभी का बेनिफिट हो. प्रकाश आगे यह भी कहते हैं कि समाज और समाज में हो रही निरंतर बदलाव को लगातार देखते आते हैं, समझते आ रहे हैं.

प्रकाश आगे कहते हैं कि “आरक्षण की बात व्यापक सामाजिक बात है. जिस पर राजनीति होना, राजनीतिक मुद्दा बनना कोई नई बात नहीं”. प्रकाश ये भी कहते हैं कि दलित गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को उस समय आरक्षण देना जरूरी था ताकि उनका उत्थान हो सके. लेकिन जो मेधावी छात्र हैं जिनका जिक्र मैंने अपनी फिल्म में भी किया था उन्हें भी न्याय मिले. हालांकि देश में सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं को ध्यान में रखकर सभी के हित में ही निर्णय लिया जाएगा इसकी उम्मीद है हर किसी को है.

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